Thursday, March 31, 2016

ऐसा नहींकी मैं समझती नहीं 
पर ये गलत है की मैं समझती रहूँ
और तुम समझते रहो। ..
की मैं समझती रहूँ। ....

कभी अपनी समझ के परे भी समझो
की मैं समझ से परे भी समझती हूँ। ....
ये क्यूों। .. की मैं समझती हूँ
की तुम समझते हो। .
की मैं समझती हूँ तुम्हें..... 

Saturday, December 5, 2015

प्रेम नहीं....

इस जीवन कुछ और करेंगे
प्रेम नहीं घनघोर करेंगे
खुद पर ही हँस लिया करेंगे
खुद पर ही हम शोक करेंगे
इस जीवन कुछ और करेंगे
प्रेम नहीं घनघोर  करेंगे
चोट लगे नहीं गौर करेंगे
हंस हंस के ही शोर करेंगे
इस जीवन कुछ और करेंगे
प्रेम नहीं घनघोर करेंगे

  

Sunday, November 15, 2015

क्षण भर

निरर्थक शब्द
निरर्थक व्यथा
क्षणभंगुर जीवन
क्या वृतान्त
क्या कथा

क्षण भर मोह
क्षण भर हया 
क्षण भर क्षेम
क्षण भर दया 

क्षण भर क्षमा
क्षण  भर भय
क्षण भर लोभ
क्षण भर प्रलय

क्षण भर प्रीत
क्षण भर रीत
क्षण भर जीत
क्षण भर विलय

निरर्थक शब्द
निरर्थक व्यथा
क्षणभंगुर जीवन
क्या वृतान्त
क्या कथा 

Sunday, December 14, 2014

मेरा मन मकान !!

 कितनी गालियाँ, कितने मकान
कितने दरिया, कितने मचान
होकर चला ये मन मेरा

किसी चौराहे एक लम्हा छोड़ा
किसी दरवाज़े एक ख्वाब
किसी खिड़की से चाहत झांके
मुझे करने को अलविदा

कहीं आस का कतरा कतरा
पड़ा गली चौबारे
खींच शरीर को मैं यूँ अपने
घूमूं द्वारे द्वारे।

जैसे हो खाली हर मकान
बस ईंटों की हो दीवार
खिड़की ताक रही वीराना
खोले पट खड़ा वो शांत
चाह रौशनी की लेकर
आत्म विहीन मेरा मन मकान !!

Monday, May 26, 2014

दुआ क्यों न की !!

इस क़दर तुमसे कोई शिकायत तो न की ,
कि मेरी उम्मीदों को कोई ठिकाना न मिले
इस तरह तुमसे कोई हिमाकत तो न की ,
की मेरी वफाओं को कोई सिला न मिले
जिससे रूबरू किया , साथ उसको लिया ,
किसी की कोई वकालत तो  न की,
पर ऐसे क्योँ मुँह मोड़ लिया,
जैसे साथ रहने की  वजह ही न थी
फिर भी हर वक़्त चलते ही रहे  हम ,
कि  तुमने पशेमाँ करने में कोई कमी भी न की !!
तुम शायद  हँसते हो मुझ पे ,
की मैंने कभी कोई दुआ क्यों न की !!





Friday, December 23, 2011

I choose…to Dare…




I choose to smile …when I open my eyes…after a nightlong nightmare …for I dared to dream anyway…
I choose to face the storm in the skies...after a long dreary day…for I dared to hope for the rains to stay...
I choose to take the new roads…and find my way…for I dared to whisk my fears away…
I choose to stand away from the maddening crowd…for I dared to believe in what I say…
I choose to mock the failures I had…for I dared to never give up…till the end of the day…
I choose to be …WHAT I AM…For I dared to challenge ..and live on the Edge ..every single day ..!!!